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Saturday, August 10, 2019

आगरा पुलिस ने मॉब लिंचिंग की शिकार औरत के साथ जो किया, उसकी तारीफ के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं


आगरा पुलिस ने मॉब लिंचिंग की शिकार औरत के साथ जो किया, उसकी तारीफ के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं


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आगरा में 7 अगस्त के दिन भीड़ ने एक औरत को बच्चा चोर समझकर बुरी तरह पीटा. लोग उसे पुलिस स्टेशन तक लेकर गए. जहां पुलिस ने उसे छुड़ा लिया. पूछताछ हुई. पता चला कि दिमागी हालत ठीक नहीं है. वो पिछले 10 साल से आगरा की सड़कों में इधर-उधर भटक रही है. पुलिस ने इस केस में थोड़ी मेहनत की और आखिर में उसके परिवार से उसको मिलवा दिया. औरत का परिवार गुजरात में रहता है. अब उसका भाई उसे लेने के लिए आगरा आ रहा है. (जानकर खुशी हुई कि पुलिसवालों में आज भी इंसानियत जिंदा है.)
मामले को ठीक-ठीक तरह से जानने के लिए हमने हमारे रिपोर्टर अरविंद शर्मा से बात की. जो कुछ भी हमें पता चला, आगे बताने जा रहे हैं.
औरत का नाम शांता तड़वीहै. उम्र करीब 60 साल है. वो आगरा की सड़कों पर भीख मांगती थी. 7 अगस्त के दिन लोगों को उसके ऊपर बच्चा चोरी करने का शक हुआ. उसके बाद उसे बुरी तरह पीटा गया. सड़कों पर घसीटा गया. फिर पुलिस स्टेशन ले जाया गया. पुलिस ने यहां इंसानियत दिखाई. शांता को नहलाया, ठीक-ठाक कपड़े पहनाए. पूछताछ की. वो ज्यादा कुछ ठीक तरह से बता नहीं पाई. बस वो बार-बार भरुच-भरुच बोल रही थी. भरुच, गुजरात का एक शहर है, जो नर्मदा नदी के किनारे बसा हुआ है.

10 साल पहले शांता अपने परिवार से बिछड़ गई थी. वो गुजरात की रहने वाली है. आगरा में रह रही थी कई साल से. फोटो- रिपोर्टर अरविंद शर्मा

आगरा पुलिस ने भरुच पुलिस को कॉन्टैक्ट किया. शांता की तस्वीर भेजी. वो तस्वीर हर जगह सर्कुलेट करवाई गई. वॉट्सऐप के जरिए लोगों के फोन पर भेजी गई. फिर भरुच में रहने वाले कांतिभाई तड़वी ने पुलिस को कॉन्टैक्ट किया. ये बताया कि शांता उसकी बहन है, और पिछले 10 साल से लापता है. आगरा पुलिस ने शांता और कांतिभाई के बीच वीडियो कॉल के जरिए बात करवाई. वो अपने भाई को पहचान गई. अब कांतिभाई उसे लेने के लिए आगरा आ रहे हैं.

क्या है शांता की कहानी?

10 साल पहले की बात है. शांता अपने ससुराल, जो कि छोटा उदयपुर में है, वहां रहती थी. उसका मायका भरुच में था. उसके पति ने दूसरी शादी कर ली, जिसके बाद वो डिप्रेशन का शिकार हो गई. लोगों को बिना बताए वो घर छोड़कर कहीं चली गई. उसके बाद से ही उसने कभी भी अपने परिवार में से किसी से भी बात नहीं की. शांता के परिवार वालों ने उसे खोजने की बहुत कोशिश की, लेकिन कुछ पता नहीं चला. लेकिन अब शांता अपने परिवार वालों के साथ है.
इस केस में पुलिस ने इंसानियत दिखाई. एक मानसिक तौर पर बीमार औरत को, जो 10 साल से दर-दर भटक रही थी, उसे उसके परिवार से मिलवाया. पुलिस का ये चेहरा वाकई बेहद प्यारा है.

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