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Monday, August 19, 2019

अमेरिका के राष्ट्रपति ने कश्मीर पर बात करने को फोन किया, जानिए मोदी ने क्या जवाब दिया

अमेरिका के राष्ट्रपति ने कश्मीर पर बात करने को फोन किया, जानिए मोदी ने क्या जवाब दिया

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मैंने अपने दो अच्छे दोस्तों से बात की- भारत के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री. व्यापार, साझेदारी और सबसे बढ़कर कश्मीर में तनाव कम करने के लिए भारत और पाकिस्तान दोनों के मिलकर काम करने के बारे में बातें हुईं. स्थिति काफी कठिन है, मगर बातचीत अच्छी रही.
20 अगस्त की तड़के सुबह 5.13 मिनट पर डॉनल्ड ट्रंप ने ये ट्वीट किया. वो 19 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ टेलिफोन पर हुई अपनी बातचीत का जिक्र कर रहे थे. बातचीत, जिसमें कश्मीर और वहां पसरा तनाव बड़ा मुद्दा था. आर्टिकल 370 पर लिए गए भारत के ताज़ा फैसले के बाद ट्रंप और मोदी के बीच हुई ये पहली बातचीत थी. ट्रंप के ट्वीट से पहले 19 अगस्त को वाइट हाउस इस बारे में बयान जारी कर चुका था. इसमें बताया गया था कि ट्रंप ने मोदी और इमरान से हुई बातचीत में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने की ज़रूरत पर जोर दिया. क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अहमियत पर बात की.
इस बातचीत से 19 अगस्त की एक और डिवेलपमेंट हुई. सरकारी पक्ष की तरफ से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को आज़ाद कराने जैसे बयान आए. ये बोलने वालों में राजनाथ सिंह और PMO के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह दोनों शामिल थे. इसके बाद एक आशंका ये पैदा हुई थी कि क्या भारत PoK में किसी तरह की सैन्य कार्रवाई के बारे में सोच रहा है?
मोदी ने ट्रंप से क्या कहा?
इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दफ़्तर PMO इंडिया ने बयान निकाला. कई सिलसिलेवार ट्वीट भी किए. ट्रंप के साथ क्या और किस बारे में बात हुई, इसका हिंट दिया गया था इनमें. लिखा था-
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के साथ टेलिफोन पर बात हुई. 30 मिनट तक हुई उनकी बातचीत में द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर बात हुई. दोनों नेताओं के आपसी रिश्तों की ही तरह ये बातचीत भी काफी गर्मजोशी और आत्मीयता से भरी रही.
फिर और कई ट्वीट किए PMO इंडिया ने. इनमें बातचीत के बारे में और विस्तार से बताया. हाईलाइट था कश्मीर. और कश्मीर के संदर्भ में भारत और पाकिस्तान के बीच के हालात. इस बारे में मोदी ने ट्रंप से क्या कहा, ये बताते हुए ट्वीट्स में लिखा था-
क्षेत्रीय स्थितियों के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र के कुछ नेताओं की आक्रामक बयानबाजी और भारत के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देना शांति के लिए मुनासिब नहीं. PM ने आतंकवाद और हिंसा मुक्त माहौल बनाने की अहमियत पर भी बात की. सीमा पार से निर्यात हो रहे आतंकवाद के हर हाल में खत्म होने पर भी बात की उन्होंने. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस राह चलने वाले देशों के साथ सहयोग करने को लेकर प्रतिबद्ध है भारत.
इमरान क्या कुछ बोल चुके हैं भारत के लिए?ये सारी बातें पाकिस्तान के संदर्भ में कही गईं. रेटॉरिक का जिक्र वहां के प्रधामंत्री इमरान खान के सिलसिले में किया गया. कश्मीर पर भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहा है. इमरान खान लगातार ट्वीट कर रहे हैं भारत के खिलाफ. वो भारत को सबक सिखाने की बात कर चुके हैं. पाकिस्तान की संसद में खड़े होकर कह चुके हैं कि पुलवामा जैसी घटनाएं दोबारा होंगी. खून की आखिरी बूंद तक जंग लड़ने की धमकी दे चुके हैं. न्यूक्लियर वॉर के लिए धमका चुके हैं. भारत की सरकार को फासिस्ट और नस्लीय बता चुके हैं. भारत पर नरसंहार की मानसिकता पालने का आरोप लगा चुके हैं.
पाकिस्तान के इंडिपेंडेंस डे में भी कश्मीर हाईलाइट था14 अगस्त को अपनी आज़ादी की सालगिरह मनाते हुए भी पाकिस्तान का पूरा फोकस कश्मीर पर था. पाकिस्तान ने कहा कि वो कश्मीर के साथ खड़ा है, सॉलिडेरिटी दिखा रहा है. इमरान खान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की असेंबली पहुंचे. वहां लंबा-चौड़ा भाषण दिया. पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अलवी ने भारत के खिलाफ सोशल मीडिया पर जंग छेड़ने की बात कही. मोदी ने ट्रंप के साथ हुई अपनी बातचीत में ये पूरा कॉन्टेक्स्ट बताकर पाकिस्तान के रवैये पर आपत्ति जताई.
पाकिस्तान को खुश होने की वजह मिली कि नहीं?ट्रंप का मोदी को फोन करना और कश्मीर में बदली स्थितियों के बाद बने तनाव पर बात करना, पाकिस्तान को काफी उम्मीदें होंगी इस बातचीत से. मगर जो मालूम है, उसके मुताबिक पाकिस्तान को खुश होने की वजह नहीं मिली है. भारत की तरफ से अमेरिका को जो कहा गया है उसका अनुवाद ये है. कि पाकिस्तान के तौर-तरीके शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से ठीक नहीं. जब तक पाकिस्तान अपना रवैया ठीक नहीं करता, भारत की तरफ से सहयोग की उम्मीद बेमानी है. और जब तक पाकिस्तान अपने बर्ताव में सुधार नहीं करता, द्विपक्षीय बातचीत की भी गुंजाइश नहीं है.
भारत ने कुछ नया नहीं कहा है ट्रंप सेअफगानिस्तान में अमेरिका और तालिबान की बातचीत अपने निर्णायक दौर में है. अफगानिस्तान से निकलने के लिए अमेरिका को वहां स्थितियां ठीक करनी हैं. तालिबान के साथ किसी ठोस समझौते पर पहुंचना है. इसके लिए उसे पाकिस्तान की ज़रूरत है. यही बात पाकिस्तान को अमेरिका के साथ बारगेनिंग पॉजिशन में लाती है. इसी वजह से पिछले दिनों जब इमरान अमेरिका पहुंचे, तो ट्रंप के साथ बातचीत में कश्मीर का मुद्दा उठा. ट्रंप ने तब कश्मीर में मध्यस्थता की पेशकश की थी. कहा था कि मोदी ने उनके सामने कश्मीर मसले में मध्यस्थ बनने का प्रस्ताव रखा था.
ट्रंप का ये दावा भारत के पारंपरिक स्टैंड से मेल नहीं खाता. उस समय भी भारत ने इसपर आपत्ति जताई थी. भारत की तरफ से साफ कहा गया कि मोदी ने ऐसा कोई ऑफर नहीं दिया है. ये किरकिरी थी ट्रंप की. साफ संकेत भी था कि भारत कश्मीर पर स्टैंड नहीं बदलने जा रहा है. ट्रंप के साथ अपनी इस ताज़ा बातचीत में भी भारत ने कुछ नया नहीं कहा है. अपना पुराना स्टैंड दोहराया है. उम्मीद है कि इससे इमरान खान सरकार को चीजें साफ हो गई होंगी. कि उन्हें किसी और का मुंह ताके बिना आपसी बातचीत के सहारे ही भारत के साथ कश्मीर विवाद सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए. और ये बातचीत शुरू हो, इसके लिए उन्हें आतंकवाद का एक्सपोर्ट करना बंद करना होगा.

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