आचार्य बालकृष्ण, योग गुरु बाबा रामदेव के सहयोगी हैं. पतंजलि की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है. 23 अगस्त को उन्हें ऋषिकेश स्थित एम्स में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है कि बालकृष्ण को बेहोशी की हालत में पहले हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ के पास भूमानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया. मगर हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें ऋषिकेश के एम्स के लिए रेफर कर दिया. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें दिल का दौरा पड़ा है.
बाबा रामदेव के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने एनबीटी से बातचीत में बताया कि आचार्य बालकृष्ण की हालत स्थिर है. चिंता की कोई बात नहीं है. वहीं भूमानंद अस्पताल में आचार्य बालकृष्ण का मेडिकल जांच करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि आचार्य बालकृष्ण को जब यहां लाया गया तो वे ठीक से बता नहीं पा रहे थे कि उन्हें क्या दिक्कत है.
फिलहाल मेडिकल परीक्षण में उनके सभी टेस्ट नॉर्मल आए हैं. लेकिन न्यूरो से संबंधित दिक्कत को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें एम्स के लिए रेफर कर दिया. हालांकि महज यह एक संयोग ही है कि हार्ट की खबर आने से पहले उन्होंने दिल की बीमारियों से बचने को लेकर ट्वीट किया था. उनका ट्वीट देखिए.
कौन हैं आचार्य बालकृष्ण
पूरा नाम बालकृष्ण सुवेदी है. बालकृष्ण के पिता जय वल्लभ उत्तराखंड के एक आश्रम में सिक्योरिटी गार्ड थे. फिर वह अपने देश नेपाल लौट गए. जय वल्लभ और सुमित्रा के 6 बच्चे हुए. उनमें से एक थे बालकृष्ण. बाल की पैदाइश के कुछ बरस बाद वल्लभ गांव लौट गए और खेती करने लगे. उसके कुछ बरस बाद 12 साल के बालकृष्ण हरियाणा आ गए पढ़ाई के वास्ते. उन्हें शुरुआत से ही योग के आहार पक्ष और उसमें बी जड़ी बूटियों में खास दिलचस्पी थी.
1. बीच में कुछ बरस रामदेव और बालकृष्ण अलग रहे. रामदेव एक दूसरे गुरुकुल में पढ़ने चले गए. जबकि बालकृष्ण जड़ी बूटियों का अध्ययन करने गंगोत्री की तरफ निकल गए. कुछ बरस बाद रामदेव भी वहीं पहुंचे.
2. 1993 में दोनों वापस हरिद्वार लौटे. रामदेव ने योग सिखाना शुरू किया, जबकि बालकृष्ण चूरण बनाने में लग गए. पहली सफलता मिली दो साल बाद. मधुसूदन चूर्ण के जरिए. रामदेव और बालकृष्ण इसे बेचने असम गए. वहां बोडोलैंड की मांग कर रहे चरमपंथी संगठन के असर वाले जिलों में कालाजार और मलेरिया फैला था. दोनों वहां काम में जुट गए. शुरू में बोडो लोगों को लगा कि ये दोनों केंद्र सरकार के एजेंट हैं. ईसाई मिशनरी भी दुश्मनी मानने लगीं. जब चूर्ण का असर दिखने लगा, तो बोडो चरमपंथियों का रुख बदल गया. फिर उन्होंने ही हिफाजत का भरोसा दिलाया.
3. 5 जनवरी 1995 को रामदेव और बालकृष्ण ने दिव्य फार्मेसी रजिस्टर करवाई. कनखल में चार कमरों में टिन शेड के तले पहला कारखाना बना. यहां दवाइयां बनतीं और चार वैद्यों वाला अस्पताल चलता. अब ये चार कमरे चार मंजिल की बिल्डिंग में बदल चुके हैं. दवाइयों के बाद जो पहला प्रॉडक्ट यहां से लॉन्च हुआ, वह था च्यवनप्राश.
4. इस कहानी का एक दूसरा वर्जन भी है. इसके मुताबिक रामदेव, बालकृष्ण और आचार्य कर्मवीर मिले. हरिद्वार के त्रिपुर योग आश्रम में. यहां तीनों दवाइयां तैयार करने में आश्रम प्रबंधन की मदद करते थे. फिर उनकी मुलाकात कृपाल बाग आश्रम के स्वामी शंकर देव से हुई. चारों ने मिलकर दिव्य योग मंदिर स्थापित किया. यह एक ट्रस्ट था. 9 महीने बाद बालकृष्ण ने दो कारोबारियों को बाहर कर दिया. कहा गया कि गलत काम करते हैं. फिर 1997 में साध्वी कमला को निकाला गया. फिर करमवीर को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया. अब बचे तीन. उसमें भी शंकर देव ने लिख दिया. ट्रस्ट के बंटवारे की स्थिति में ट्रस्ट की संपत्ति इसी नीयत के साथ बने दूसरे ट्रस्ट को सौंप दी जाए.
5. 2006 में पतंजलि आर्युवेद की स्थापना की रामदेव और बालकृष्ण ने. इसके लिए गोविंद अग्रवाल ने 1 करोड़ दिए और पप्पुल पिल्ली ने 7 करोड़. शुरुआत में दवाई और डेरी प्रॉडक्ट बने. फिर यूके में रहने वाले सरवन और सुनीता पोद्दार ने 50 करोड़ दिए. बैंक ने भी 2007 में 10 करोड़ लोन दिया. उसके बाद बालकृष्ण 94 फीसदी के मालिक बने और बाकी छह फीसदी के मालिक पोद्दार परिवार. समूह ने अगले तीन सालों में 250 करोड़ का निवेश पाया. समूह की नई कंपनियों में रामदेव के भाई रामभरत का भी कुछ मालिकाना हक है.
6. फोर्ब्स की 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक 25600 करोड़ रुपये के मालिक हैं बालकृष्ण. 98.5 के मालिक अनलिस्टेड कंपनी में. देखिए उनका सफर कहां से कहां पहुंच गया. नेपाल से भारत आए थे. किशोर वय में. गुरुकुल में. संस्कृत और योग. और आज पूरे देश को कारोबार पढ़ा रहे हैं.
पतंजलि समर्थक कहते हैं कि बालकृष्ण ने युवावस्था में ही संजीवनी बूटी खोज ली थी. वही मिथकीय बूटी, जिसके सेवन से लक्ष्मण की मूर्छा खुली थी. जब कोई सफल होता है, तो मिथक भी बनने ही लगते हैं. ये जानकारी बरास्ते कौशिक डेका की किताब. ‘द बाबा रामदेव फिनोमिना- फ्रॉम मोक्ष टु मार्केट’से ली गई है.





No comments:
Post a Comment